‘रावण का गाँव’!’जहां’ राम नहीं, रावण की पूजा!

‘रावण का गाँव’!’जहां’ राम नहीं, रावण की पूजा!

‘रावण का गाँव’!

रावण का गांव बिसरख। जहां दशहरे पर रावण नहीं जलाया जाता है। न रामलीला होती है, जहां रावण का जन्म हुआ था। रावण को राक्षस नहीं बल्कि इस गांव का बेटा मानते हैं। 1984 में यहां चंद्रस्वामी नामक एक तांत्रिक ने खुदार्इ करवार्इ थी

बिसरख गांव रावण का ख़ानदानी गांव है। यहीं रावण राज का जन्म हुआ था। बिसरख में बने रावण मंदिर के पंडित बताते हैं, रावण के पिता विश्रव ब्राह्मण थे। उन्होंने राक्षसी राजकुमारी कैकसी से शादी कर इंटर-कास्ट मैरिज की मिसाल रखी थी। रावण के अलावा कुंभकरण, सूर्पनखा और विभीषण का जन्म भी इसी गांव में हुआ। जब पूरा देश अच्छाई की बुराई पर जीत के रूप में रावण के पुतले का दहन करता है, तब इस गांव में मातम का माहौल होता है गांव के लोग न रामलीला आयोजित करते हैं और न कभी रावण का दहन करते हैं। बल्कि दशहरा पर यहां शोक मनाया जाता है। इस परंपरा के पीछे गांव का इतिहास जुड़ा है। यहां दो बार रावण दहन किया गया,दोनों ही बार रामलीला के दौरान किसी न किसी की मौत हुई। बिसरख में शिव मंदिर के पुजारी महंत रामदास का कहना है, 60 साल पहले इस गांव में पहली बार रामलीला का आयोजन किया गया था। रामलीला के बीच में जिस व्यक्ति के घर में आयोजन हुआ उसी का बेटा मर गया। कुछ समय बाद गांववालों ने फिर से रामलीला रखी। इस बार उसमें हिस्सा लेने वाले एक पात्र की मौत हो गई। तब से ही यहां दशहरा पर रावण का पुतला नहीं जलता, न रामलीला होती है। यहां रावण की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ-हवन किए जाते हैं। साथ ही नवरात्रि के दौरान शिवलिंग पर बलि चढ़ाई जाती है

Bisrakh - Bisrakh will mourn Ravana

On Dussehra, Bisrakh will mourn Ravana

गांव का जिक्र शिवपुराण में भी किया गया है। कहा जाता है कि त्रेता काल में इस गांव में ऋषि विश्रव का जन्म हुआ था। उन्होंने यहां अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना की। यह पौराणिक काल की शिवलिंग बाहर से देखने में महज 2.5 फीट की है, लेकिन जमीन के नीचे इसकी लंबाई लगभग 8 फीट है। इस गांव में अब तक 25 शिवलिंग मिले हैं, जिनमें से एक की गहराई इतनी है कि खुदाई के बाद भी उसका कहीं छोर नहीं मिला है। मंदिर के महंत रामदास ने बताया कि खुदाई के दौरान त्रेता काल के नरकंकाल, बर्तन और मूर्तियों के अलावा कई अवशेष मिले हैं।

Bisrakh-Ancient temple of Lord Shiva at Bisrakh

Bisrakh boasts an octagonal shivling that is probably the only one of its kind.

गांव के शिव मंदिर को नए सिरे से बनाया जा रहा है। इस मंदिर का बजट लगभग 2 करोड़ रुपए का है।
यहां रावण की 5.5 फीट ऊंची मूर्ति के अलावा 42 फीट ऊंचे शिवलिंग को स्थापित करने की तैयारी हो रही है। रावण की मूर्ति जयपुर से बनवाई गई है और स्थापना के लिए तैयार है। दो मंदिरों के पुजारियों की आपसी गुटबाजी के चलते पिछले 10 सालों से रावण की मूर्ति स्थापित नहीं हो पा रही। गांव वाले इस मूर्ति की पूजा भी करते हैं, जो कि मंदिर के बरामदे में रखी हुई है। यहां के निवासी शिव मंदिर को ही रावण का मंदिर कह कर पूजा करते हैं। यहां की दीवारों पर रावण के पिता की आकृति भी बनी हुई है।